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बिलासपुर पुलिस का कमाल — अधजली लाश से हत्यारे तक पहुँची पूरी कहानी.. कप्तान ने किया इनाम का ऐलान

खुफिया जाँच ने 30 दिन पुराना ब्लाइंड केस खोला

बिलासपुर… लगभग 30 दिन पुराने ‘ब्लाइंड मर्डर’ की गुत्थी आखिरकार पुलिस ने सुलझा ली है। 7 नवंबर को तिफरा सब्ज़ी मंडी रोड के पीछे झाड़ियों में मिली अधजली लाश ने जांच को शुरू से ही चुनौतीपूर्ण बना दिया था। न पहचान, न कोई प्रत्यक्ष सुराग और न कोई चश्मदीद—जांच पूरी तरह तकनीक, धैर्य और पेशेवर क्षमता पर आधारित थी। आज यह पूरा केस प्रदेश की आधुनिक पुलिसिंग का एक उल्लेखनीय मॉडल बन गया है।

जांच का पहला और सबसे कठिन चरण मृतक की पहचान स्थापित करना था। एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देशन में सिरगिट्टी थाना, ACCU और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने टावर-डंप और मोबाइल डेटा पैटर्न का विश्लेषण किया। संदिग्ध मूवमेंट की मेटाडेटा स्टडी से एक मोबाइल नंबर चिन्हित हुआ, जिसने आगे मृतक की पहचान का रास्ता खोला। वैज्ञानिक जांच के आधार पर शव की पहचान गोपाल , निवासी सोनभद्र, उत्तर प्रदेश के रूप में की गई। इसी पहचान ने जांच को ठोस दिशा प्रदान की।

इसके बाद मानव खुफिया तंत्र सक्रिय किया गया। थाना प्रभारी किशोर केवट और सीएसपी सिविल लाइन निमितेश परिहार के नेतृत्व में टीम ने स्थानीय गतिविधियों, बाजार क्षेत्रों और शराब ठिकानों में चिह्नित व्यक्तियों की जानकारी एकत्र की। कई संदिग्धों पर कई दिनों तक चुपचाप नजर रखी गई। इस निगरानी और ह्यूमन इंटेलिजेंस से दो व्यक्ति लगातार संदेह के घेरे में आए—अरुण दास मानिकपुरी और धनेश लोधी उर्फ राजू।

दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की प्रक्रिया जल्दबाजी में नहीं, बल्कि पूरी वैज्ञानिक पद्धति से आगे बढ़ाई गई। समय-सीमा, लोकेशन पैटर्न, गतिविधियों, और मौके के तार्किक विश्लेषण ने आरोपियों की कथित कहानी में कई विरोधाभास सामने ला दिए। क्रमिक पूछताछ में दोनों ने अंततः अपराध स्वीकार कर लिया। खुलासा हुआ कि मृतक गोपाल शराब सेवन के दौरान आरोपियों से विवाद में उलझा और पत्थर से वार किए जाने के बाद उसकी मृत्यु हो गई। पहचान छिपाने के लिए आरोपी शव और कपड़ों को जलाने का प्रयास कर रहे थे।

पूरे प्रकरण के बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने इसे पेशेवर जाँच-पद्धति का एक आदर्श उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि अधजली लाश की पहचान से लेकर आरोपियों की अंतिम गिरफ्तारी तक टीम ने तकनीकी विश्लेषण, मानव खुफिया तंत्र और निरंतर फील्ड निगरानी—इन तीनों का संतुलित और व्यावहारिक उपयोग किया। कप्तान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि थाना प्रभारी किशोर केवट, सीएसपी निमितेश परिहार और संपूर्ण टीम ने जिस प्रोफेशनल दक्षता, संयम और अत्यधिक फील्ड-लेवल समर्पण का प्रदर्शन किया, वह सराहनीय है। उन्होंने पूरी टीम को बधाई देते हुए नगद इनाम देने की घोषणा की और कहा कि आगे भी हर महत्वपूर्ण जाँच इसी सक्रियता और वैज्ञानिक पद्धति से संचालित होगी, ताकि जनता को समय पर न्याय मिल सके।

यह केस अब सभी आवश्यक साक्ष्यों और तकनीकी प्रमाणों के साथ न्यायिक प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है। सिरगिट्टी, सिविल लाइन, सरकंडा, तारबाहर, ACCU और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब तकनीक और मानव खुफिया एक साथ काम करें तो कोई भी मामला वास्तव में ‘ब्लाइंड’ नहीं रहता।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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