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TET Exam : TET अनिवार्यता के खिलाफ आर-पार की जंग: देशभर में सोमवार को मशाल जुलूस निकालेंगे शिक्षक

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी व विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि कल का दिन हमारे लिए महत्वपूर्ण है। हम सब मशाल जलाकर सरकार का ध्यान आकर्षित करेंगे। जिससे टेट की अनिवार्यता को समाप्त किया जा सके।

tet exam/दिल्ली। उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश के शिक्षकों ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर आगामी 13 अप्रैल को देशभर के जिला मुख्यालयों पर हजारों शिक्षक ‘मशाल जुलूस’ निकालकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगे। शिक्षकों का यह गुस्सा उस नियम को लेकर है, जिसके तहत शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए भी अब टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।

tet exam/विभिन्न शिक्षक संगठनों ने मिलकर इस महासंघ का निर्माण किया है ताकि एकजुट होकर इस “अन्यायपूर्ण” नीति का मुकाबला किया जा सके।

महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पाण्डेय और अटेवा (ATEWA) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने इस आंदोलन की रूपरेखा साझा करते हुए कहा कि जो शिक्षक दशकों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं और जिनकी नियुक्ति पुराने नियमों के आधार पर हुई थी, उन पर अब नई शर्तें थोपना न तो तर्कसंगत है और न ही न्यायोचित।

उन्होंने मांग की है कि पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस नई पात्रता शर्त से तत्काल राहत दी जानी चाहिए। वहीं, विधिक मामलों के जानकार और टीएससीटी के संस्थापक विवेकानन्द ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि शिक्षक अब चुप नहीं बैठेंगे और मशाल जुलूस से लेकर देश की सर्वोच्च अदालत तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के लगभग सभी बड़े शिक्षक संगठनों ने अपना समर्थन दिया है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी और विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने 13 अप्रैल के दिन को शिक्षकों के सम्मान की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है।

उन्होंने कहा कि मशाल जलाकर सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया जाएगा ताकि वरिष्ठ शिक्षकों के सिर पर लटक रही नौकरी जाने की तलवार को हटाया जा सके।

आंदोलन की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें अंतर्जनपदीय शिक्षक बेसिक एसोसिएशन, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, एससी-एसटी शिक्षक संघ, प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक बेसिक एसोसिएशन और माध्यमिक शिक्षक संघ जैसे दर्जनों प्रभावशाली संगठन शामिल हो रहे हैं। कमलेश पांडेय, अपूर्व दीक्षित, दिनेश विद्रोही, विनय सिंह, डॉ. महेंद्र यादव, सोहन लाल वर्मा, रवींद्र सिंह, बंदना सिंह चौहान और शालिनी मिश्रा जैसे दिग्गज शिक्षक नेताओं ने सभी शिक्षकों से भारी संख्या में सड़कों पर उतरने की अपील की है। शिक्षकों का साफ कहना है कि जब तक टीईटी की अनिवार्यता को पुराने शिक्षकों के लिए समाप्त नहीं किया जाता, तब तक उनका यह संघर्ष थमने वाला नहीं है।

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