बिलासपुर । सवर्ण समाज की ओर से आरक्षण नीति, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से संबंधित प्रावधानों तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 सहित विभिन्न कानूनों के संबंध में सुधार एवं पुनर्विचार की मांग को लेकर महामहिम राष्ट्रपति प्रधानमंत्री एवं राज्यपाल व मुख्यमंत्री छत्तीसगढ के नाम जिलाधीश के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय संविधान का मूल उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अवसर, न्याय और गरिमा प्रदान करना है। बदलती सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीतियों की समय-समय पर समीक्षा आवश्यक है, ताकि वास्तविक रूप से जरूरतमंद नागरिकों तक सरकारी सुविधाओं का लाभ पहुंच सके।

ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था की अवधि एवं वर्तमान परिस्थितियों की समीक्षा करते हुए आरक्षण का आधार जाति के स्थान पर आर्थिक एवं सामाजिक आवश्यकता को बनाए जाने की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि स्वतंत्रता के समय जिन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर आरक्षण की व्यवस्था की गई थी, उनमें आज काफी परिवर्तन हो चुका है। अतः व्यापक सामाजिक संवाद एवं संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए।इसके साथ ही ज्ञापन में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 के अंतर्गत निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा, कानून के संभावित दुरुपयोग को रोकने तथा निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुधारों की मांग की गई।

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ज्ञापन में UGC से संबंधित प्रावधानों तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में समान अवसर, पारदर्शिता और सभी विद्यार्थियों के लिए निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी उठाई गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि किसी भी कानून या नीति का उद्देश्य सामाजिक न्याय के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना होना चाहिए।ज्ञापन में कर्नाटक में लागू किए गए ‘रोहित वेमुला एक्ट’ के संबंध में भी उसके प्रावधानों, प्रभाव और संभावित व्यावहारिक कठिनाइयों की समीक्षा किए जाने तथा विद्यार्थियों के अधिकारों एवं संस्थानों की निष्पक्षता के बीच संतुलन स्थापित करने की मांग की गई।

सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी भी वर्ग के अधिकारों को समाप्त करने के उद्देश्य से नहीं है, बल्कि समान अवसर, निष्पक्षता, पारदर्शिता और आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को वास्तविक सहायता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है।

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प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से मांग की कि आरक्षण एवं संबंधित कानूनों की वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप व्यापक समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की जाए तथा सभी सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों से संवाद कर आवश्यक संवैधानिक एवं विधायी सुधार किए जाएं।

प्रमुख मांगें:

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आरक्षण व्यवस्था की वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप व्यापक समीक्षा की जाए।

आरक्षण का आधार जाति के स्थान पर आर्थिक एवं सामाजिक आवश्यकता को बनाने पर विचार किया जाए।

SC/ST Act, 1989 में निर्दोष नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा तथा कानून के दुरुपयोग की संभावनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएं।

UGC से संबंधित नियमों में उच्च शिक्षा संस्थानों में समान अवसर, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।

‘रोहित वेमुला एक्ट’ सहित संबंधित विधायी प्रावधानों की संवैधानिकता, व्यावहारिक प्रभाव और संभावित कठिनाइयों की समीक्षा की जाए।

इन विषयों पर सभी वर्गों के प्रतिनिधियों से व्यापक संवाद कर सहमति आधारित समाधान निकाला जाए।

सवर्ण समाज ने सरकार से अपेक्षा व्यक्त की कि वह इन विषयों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए सामाजिक समरसता, समान अवसर और संवैधानिक न्याय की भावना के अनुरूप आवश्यक कदम उठाएगी।

इस अवसर पर ज्ञापन सौपने समग्र सवर्ण समाज के सदस्य प्रमुख रूप से कान्यकुब्ज ब्राम्हण समाज  से अध्यक्ष अरविंन्द दीक्षित सचिव राजेश शुक्ला संयोजक मनोज तिवारी के साथ अनिल तिवारी एवं संयोजक मनीष अग्रवाल,डा प्रदीप शुक्ला .( अध्यक्ष छतीसगढ़ी ब्राम्हण विकास परिषद ) जगदीश त्रिवेदी,मनोज शुक्ला, गोपाल मिश्रा, संदीप बाजपेयी,दिव्य प्रकाश दुबे ,विनय दीक्षित, रोशन अवस्थी,अनुग्रह मिश्रा ,एस एन बाजपेयी ,चुट्टू अवस्थी,सिंघी सैंट्ल पंचायत समाज के अध्यक्ष विनोद मेघानी , धनराज आहूजा डी डी आहुजा,
राजपूत क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष अजय सिंह परिहार , प्रियंक परिहार,खण्डेलवाल समाज अध्यक्ष अशीष खंडेलवाल गुजराती समाज अध्यक्ष केतन सुतारिया, अरविंद भानूशाली, हरि भाई पटेल, वितेन्द्र पाठक ,गोपाल जैन, पंजाबी समाज अध्यक्ष परमजीत सिंह सलूजा, अमरजीत दुआ,नितिन छाबड़ा,राजेश आहुजा, चरण जीत गंभीर, राजेन्द्र अग्रवाल राजू, कैलाश गुप्ता,वन्दे मातरम मित्र मंडल के अध्यक्ष महेन्द्र जैन, विंध्य ब्राम्हण समाज आशुतोष मिश्रा, शुभम त्रिपाठी, मारवाड़ी ब्राम्हण समाज अध्यक्ष सुरेश शर्मा, ईश्वर तिवारी
सहित सामान्य समाज के सदस्य गण उपस्थित हो स्वर्ण समाज के हितों का ध्यान रखने  राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री,  राज्यपाल,  मुख्यमंत्री के नाम बिलासपुर जिलाधीश कलेक्टर  के माध्यम ज्ञापन सौंपकर सामाजिक भेदभाव सामान्य समाज के साथ न हो इस पर अपनी बात रखी।