कृष्ण वामन द्वादशी पर विजय मुहूर्त के साथ त्रिपुष्कर योग, नोट कर लें राहुकाल

दिल्ली।हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल द्वादशी को मनाई जाने वाली वामन द्वादशी के लगभग पंद्रह दिन बाद कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को कृष्ण वामन द्वादशी पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा-अर्चना की जाती है।
भगवान वामन को नारायण का पांचवां अवतार माना जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों में वामन अवतार की कथा राजा बलि से जुड़ी हुई है, जिसमें छोटे ब्राह्मण रूप में भगवान विष्णु ने तीन पग भूमि दान लेकर असुर राजा को वश में किया था।
इस अवसर पर विष्णु भक्त विशेष रूप से उपवास रखते हैं। द्वादशी तिथि भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस दिन व्रत रखने और पूजन करने से भगवान प्रसन्न होते हैं व भक्तों को धन-धान्य और सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।
कृष्ण वामन द्वादशी तिथि पर सूर्योदय 5 बजकर 57 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 46 मिनट पर होगा। कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि रविवार को पूरे दिन के साथ अगले दिन (15 अप्रैल) देर रात 12 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।
नक्षत्र शतभिषा दोपहर 4 बजकर 6 मिनट तक, इसके बाद पूर्व भाद्रपद रहेगा। योग शुक्ल दोपहर 3 बजकर 40 मिनट तक, करण कौलव दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।
14 अप्रैल के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 27 मिनट से 5 बजकर 12 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक, विजय मुहूर्त 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 45 मिनट से शाम 7 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। वहीं, अमृत काल सुबह 8 बजकर 53 मिनट से 10 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। साथ ही त्रिपुष्कर योग शाम 5 बजकर 6 मिनट से अगले दिन देर रात 12 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 3 बजकर 34 मिनट से 5 बजकर 10 मिनट तक, यमगंड सुबह 9 बजकर 9 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक, गुलिक काल दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। वहीं, पंचक पूरे दिन प्रभावी रहेगा।




