LIVE UPDATE
india

ड्रंक ड्राइविंग एक अपराध है, लेकिन वाहन को दंड के रूप में नहीं रखा जा सकता…..

हैदराबाद। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Telangana High Court ने शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामलों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि केवल इस आधार पर कि चालक नशे में है, किसी भी वाहन को जब्त नहीं किया जा सकता और पुलिस को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, Justice E. V. Venugopal ने यह टिप्पणी जुलाई 2025 में अलवाल ट्रैफिक पुलिस द्वारा जब्त की गई एक महिंद्रा XUV 500 से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। इस प्रकरण में वाहन मालिक की ओर से रिट याचिका दायर कर पुलिस की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत ने कहा कि यदि कोई चालक नशे की हालत में पाया जाता है, तो उसे तुरंत वाहन चलाने से रोका जाना चाहिए, लेकिन वाहन को सीधे जब्त करना उचित नहीं है। यदि वाहन में कोई अन्य व्यक्ति मौजूद है जो होश में है और उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस है, तो वाहन उसी को सौंपा जाना चाहिए। यदि चालक अकेला हो, तो पुलिस को उसके परिजन या परिचित को बुलाकर वाहन सुपुर्द करना होगा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल ऐसी स्थिति में, जब कोई अधिकृत व्यक्ति उपलब्ध न हो, पुलिस वाहन को अस्थाई रूप से अपने कब्जे में ले सकती है और उसे सुरक्षित स्थान पर रख सकती है। हालांकि, वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने पर वाहन को शीघ्र छोड़ना अनिवार्य होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत ने कहा कि ड्रंक ड्राइविंग एक अपराध है, लेकिन वाहन को दंड के रूप में नहीं रखा जा सकता। पुलिस को तीन दिनों के भीतर मामले में चार्जशीट दाखिल करनी चाहिए और आगे की कार्रवाई विधि अनुसार की जानी चाहिए। साथ ही, सभी पुलिस अधिकारियों को Telangana Motor Vehicles Rules Rule 448-A का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें वाहन जब्ती, हिरासत और रिहाई की प्रक्रिया निर्धारित है।

अदालत ने यह भी चेतावनी दी है कि इन निर्देशों का उल्लंघन करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। यह फैसला नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
Back to top button
close