सरकार ने बताया टारगेट: तेंदूपत्ता सीजन से पहले सीमा सील, आग और अवैध कारोबार पर सख्त प्लान
तेंदूपत्ता सीजन 2026 की तैयारी तेज: 1.43 लाख मानक बोरा लक्ष्य

बलरामपुर। (पृथ्वी लाल केशरी)…तेंदूपत्ता सीजन 2026 के लिए इस बार लक्ष्य बड़ा है और तैयारी भी उसी अनुपात में शुरू हो गई है। जिले में 1,43,900 मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य तय किया गया है। इसी को लेकर वन विभाग ने शाखा-कर्तन से पहले जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण और समन्वय की कवायद तेज की है।
वन मण्डलाधिकारी आलोक वाजपेयी के निर्देश पर वन परिक्षेत्र कैम्पस धमनी (रामचन्द्रपुर) में कार्यशाला आयोजित हुई, जिसमें सातों समितियों के प्रबंधक, प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के अध्यक्ष-सदस्य, फड़मुंशी, पोषक अधिकारी, फड़ अभिरक्षक और स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का फोकस स्पष्ट रहा—बेहतर शाखा-कर्तन से उच्च गुणवत्ता का तेंदूपत्ता और संग्रहण में पारदर्शिता।
कार्यशाला में बताया गया कि इस वर्ष संग्राहक परिवारों को 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से भुगतान किया जाएगा, जबकि शाखा-कर्तन पर 70 रुपये प्रति मानक बोरा प्रोत्साहन राशि तय है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि गुणवत्ता और समयबद्धता दोनों पर निगरानी रखी जाएगी।
अंतरराज्यीय सीमा से लगे क्षेत्रों—रामचन्द्रपुर, दोलंगी, सनावल, पचावल, सुन्दरपुर और डिण्डो—में अवैध तेंदूपत्ता व्यापार को रोकने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई। उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और झारखंड की ओर जाने-आने वाले मार्गों पर नाकेबंदी, पात्र संग्राहकों का सर्वे और तेंदूपत्ता कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया।
वन क्षेत्र में आग की घटनाओं को देखते हुए अग्नि नियंत्रण भी एजेंडा में प्रमुख रहा। महुआ बीनने वालों को सूचीबद्ध कर आग नहीं लगाने का शपथ-पत्र लेने की योजना बनी। दीवार लेखन, छोटे टोले-मजरों में जागरूकता अभियान, और वन क्षेत्र में आग लगने की स्थिति में तत्काल सूचना देने के लिए टोल-फ्री नंबर और संबंधित कर्मचारियों के संपर्क साझा किए गए।
बैठक में जिला संघ के उप प्रबंध निदेशक संतोष पांडे, वन परिक्षेत्र अधिकारी अजय वर्मा सहित वन विभाग और सहकारी समितियों से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे।




