CG Highcourt Decision : इस यूनिवर्सिटी के छात्रों को झटका, पीजीडीआरडी डिग्री पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, नियुक्तियों पर संशय गहराया
हाईकोर्ट ने एक आदेश जारी कर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में होने वाली नियुक्तियों पर ISBM यूनिवर्सिटी से PGDRD पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन रूरल डेवलपमेंट करने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी है।

CG Highcourt Decision/छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने प्रदेश की एक निजी यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित डिप्लोमा कोर्स की वैधता को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।
जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में होने वाली नियुक्तियों के संबंध में एक अंतरिम आदेश देते हुए ISBM यूनिवर्सिटी से ‘पीजीडीआरडी’ (पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन रूरल डेवलपमेंट) करने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं, जिन्होंने इस यूनिवर्सिटी से यह विशेष डिप्लोमा हासिल किया था और सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे थे। हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आगामी सुनवाई तक संबंधित यूनिवर्सिटी की यह डिग्री रखने वाले उम्मीदवारों को नियुक्ति आदेश जारी न किए जाएं।
CG Highcourt Decision/इस कानूनी विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रियांशु दानी और उनके साथ सात अन्य अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इस कोर्स की प्रामाणिकता को चुनौती दी।
याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह है कि आईएसबीएम (ISBM) यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित किया जा रहा पीजीडीआरडी डिप्लोमा कोर्स निर्धारित शैक्षणिक मानदंडों और सरकारी नियमों को पूरा नहीं करता है। याचिका में यह गंभीर खुलासा किया गया है कि इस संबंध में शिकायतों के बाद 16 सितंबर 2025 को एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई थी।
इस समिति ने 9 अक्टूबर 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें पाया गया कि यूनिवर्सिटी का यह विशेष पाठ्यक्रम अवैध रूप से संचालित किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी यह प्रोग्राम अपने ‘ऑर्डिनेंस नंबर 57’ के तहत चला रही है, जो कि वास्तव में कॉमर्स और मैनेजमेंट फैकल्टी के डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए निर्धारित है, न कि रूरल डेवलपमेंट (ग्रामीण विकास) के लिए।
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब यह तथ्य सामने आया कि स्वयं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने भी इस पाठ्यक्रम को अमान्य माना है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि विभाग के आयुक्त से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया था, जहां जांच समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए इस कोर्स को अवैध और अमान्य करार दिया गया।
CG Highcourt Decision/याचिकाकर्ताओं की मांग है कि जब तक इस मामले में पूरी जांच नहीं हो जाती और स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक इस डिग्री के आधार पर किसी भी प्रकार की सरकारी नियुक्ति न की जाए।
हाई कोर्ट ने इस प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए न केवल नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगाई है, बल्कि मामले से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार, उच्च शिक्षा विभाग, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में निर्धारित की गई है।




