Naxalite leader Devji surrender- लाल आतंक की कमर टूटी, मोस्ट वांटेड नक्सलियों के टाॅप लीडर देवजी ने किया सरेंडर
नक्सल संगठन को बड़ा झटका लगा है। माओवादियों के टाॅप नेता देवजी और मल्ला राजिरेड्डी ने आत्मसमर्पण कर दिया। देवजी ने यह सरेंडर तेलंगाना में किया है। देवजी नक्सल संगठन की सेन्ट्रल कमेटी के सेक्रेटरी थे। सरकार ने 1.50 करोड़ का इनाम घोषत कर रखा था।

Naxalite leader Devji surrender/नक्सलवाद के खिलाफ जारी निर्णायक जंग में सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। देश के सबसे खूंखार और मोस्ट वांटेड नक्सली नेताओं में शुमार देवजी और मल्ला राजिरेड्डी ने तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।
नक्सल संगठन की सेंट्रल कमेटी के सेक्रेटरी और महासचिव के पद पर आसीन देवजी पर सरकार ने 1.50 करोड़ रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित (Naxalite leader Devji surrender) कर रखा था। देवजी के साथ करीब डेढ़ दर्जन अन्य माओवादियों के सरेंडर की भी खबर है, जिसने नक्सली खेमे में हड़कंप मचा दिया है। इस सरेंडर के साथ ही माओवादी संगठन अब पूरी तरह से नेतृत्व विहीन हो गया है, जिसे लाल आतंक के अंत की शुरुआत माना जा रहा है।
देवजी केवल एक नाम नहीं, बल्कि नक्सल आंदोलन का मुख्य रणनीतिकार था। वह छत्तीसगढ़, तेलंगाना, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ था।
पिछले साल मई में पूर्व महासचिव नम्बाला केशव राव उर्फ बसवराजू के सरेंडर के बाद देवजी को ही संगठन की कमान सौंपी गई थी। देवजी के साथ मल्ला राजिरेड्डी उर्फ संग्राम का सरेंडर (Naxalite leader Devji surrender) करना भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये दोनों नेता लंबे समय से गढ़चिरौली और छत्तीसगढ़ के जंगलों में सक्रिय रहकर हिंसक वारदातों की साजिश रच रहे थे। इनके सरेंडर से सुरक्षा बलों को खुफिया जानकारी का खजाना मिलने की उम्मीद है, जिससे बचे हुए छोटे समूहों को खत्म करना आसान होगा।
इस बड़ी कामयाबी पर छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने उत्साह व्यक्त करते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया है। उन्होंने पुष्टि की कि तेलंगाना पुलिस के सामने देवजी और मल्ला राजिरेड्डी ने घुटने टेक दिए हैं। गृहमंत्री ने कहा, “यह हमारे लिए बहुत बड़ी जीत है। हम नक्सलवाद के खात्मे के अंतिम पड़ाव पर पहुंच गए हैं।
हमारे पास जानकारी है कि कुछ और बड़े नक्सली नेता भी आत्मसमर्पण (Naxalite leader Devji surrender) करने की सोच रहे हैं और उनसे बातचीत का दौर चल रहा है। ‘ऑपरेशन कगार’ का असर अब जमीन पर दिखने लगा है।”
गौरतलब है कि देश के गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सलियों के पूरी तरह सफाए के लिए मार्च 2026 की समय सीमा (डेडलाइन) तय की है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा बल ‘ऑपरेशन कगार’ के तहत सघन अभियान चला रहे हैं। देवजी जैसे टॉप कमांडर का सरेंडर करना यह दर्शाता है कि अब नक्सली विचारधारा के प्रति कैडरों का मोहभंग हो रहा है और वे सरकार की मुख्यधारा में लौटने को मजबूर हैं।




