Omkareshwar Jewellery Theft- श्रद्धा के नाम पर असुरक्षा! ओंकारेश्वर में लूट का शिकार हुआ परिवार, पुलिस की चुप्पी तोड़ने के लिए जज को करना पड़ा फोन
हैरानी की बात यह है कि जब पीड़ित परिवार मदद की गुहार लेकर मांधाता थाने पहुंचा, तो उन्हें सहयोग के बजाय टालमटोल का सामना करना पड़ा। जांच के दौरान पता चला कि पार्किंग स्थल के ठीक सामने मंदिर के प्रवेश द्वार पर लगा सीसीटीवी कैमरा बंद पड़ा था। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस ने एफआईआर लिखने से यह कहते हुए मना कर दिया कि "यहाँ रोजाना ऐसी चोरी की वारदातें होती हैं और बड़े अधिकारियों ने चोरी के मामलों में एफआईआर न करने के निर्देश दिए हैं।"

Omkareshwar Jewellery Theft/मध्यप्रदेश की पवित्र तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में दर्शन करने आए एक श्रद्धालु परिवार के लिए यात्रा तब कड़वे अनुभव में बदल गई, जब उनकी कार से लाखों के जेवर और नकदी चोरी हो गए।
यह मामला केवल एक साधारण चोरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें पुलिस की कथित संवेदनहीनता का एक चौंकाने वाला पहलू भी सामने आया है। राजस्थान के सीकर निवासी व्यवसायी अविनाश जांगिड़ और उनके परिवार के साथ हुई इस घटना ने तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के अनुसार, पीड़ित परिवार उत्तर प्रदेश से अपने एडवोकेट भाई के साथ ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने पहुंचा था। इससे पहले उन्होंने उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती में शामिल हुए। ओंकारेश्वर पहुंचने पर भारी भीड़ के कारण परिवार की महिलाएं दर्शन के लिए मंदिर चली गईं, जबकि पुरुष नर्मदा तट की ओर चले गए।
इसी दौरान ब्रह्मपुरी पार्किंग में खड़ी उनकी कार का दरवाजा खोलकर किसी अज्ञात बदमाश ने वहां रखा पर्स पार कर दिया। पीड़ित परिवार के अनुसार, पर्स में करीब 2 लाख रुपये कीमत के सोने-चांदी के जेवर (चार अंगूठी, एक चेन, मंगलसूत्र, पायल), 17 हजार रुपये नकद और आईफोन सहित दो महंगे मोबाइल फोन थे।
हैरानी की बात यह है कि जब पीड़ित परिवार मदद की गुहार लेकर मांधाता थाने पहुंचा, तो उन्हें सहयोग के बजाय टालमटोल का सामना करना पड़ा। जांच के दौरान पता चला कि पार्किंग स्थल के ठीक सामने मंदिर के प्रवेश द्वार पर लगा सीसीटीवी कैमरा बंद पड़ा था। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस ने एफआईआर लिखने से यह कहते हुए मना कर दिया कि “यहाँ रोजाना ऐसी चोरी की वारदातें होती हैं और बड़े अधिकारियों ने चोरी के मामलों में एफआईआर न करने के निर्देश दिए हैं।”
घंटों थाने में बैठने के बाद भी जब पुलिस का रवैया नहीं बदला, तो पीड़िता के अधिवक्ता भाई को मजबूरन अपने परिचित मजिस्ट्रेट को फोन करना पड़ा।
खंडवा में पदस्थ मजिस्ट्रेट के हस्तक्षेप और उनके फोन आने के बाद ही पुलिस हरकत में आई और आनन-फानन में मामला दर्ज किया गया। एक तरफ जहां सरकार और प्रशासन तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षा देने का दावा करते हैं, वहीं दूसरी ओर एक प्रतिष्ठित तीर्थनगरी में एफआईआर दर्ज कराने के लिए ‘कानूनी सोर्स’ का सहारा लेना पड़ना प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है




