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Skanda Sashti Vrat Niyam 2026- स्कंद षष्ठी व्रत से जुड़े कई नियम ,जिनका पालन करना अनिवार्य माना जाता है

जिन दंपतियों को संतान प्राप्ति में बाधाएं आ रही हों, उन्हें भी स्कंद षष्ठी का व्रत रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि कार्तिकेय जी की कृपा से संतान सुख शीघ्र प्राप्त होता है।

Skanda Sashti Vrat Niyam 2026: हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी व्रत का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यह व्रत रखा जाता है और इस बार फरवरी में स्कंद षष्ठी कल यानी 22 फरवरी को रखा जाएगा। यह व्रत भगवान कार्तिकेय को समर्पित होता है, जिन्हें भगवान शिव और माता पार्वती का ज्येष्ठ पुत्र माना जाता है। मान्यता है कि जिन भक्तों पर कार्तिकेय जी की विशेष कृपा रहती है, उनके जीवन में रोग, शत्रुजनित कष्ट और मंगल दोष का प्रभाव कम हो जाता है। संतानवती महिलाएं अपने बच्चों के स्वास्थ्य, दीर्घायु और उज्ज्वल भविष्य की कामना से यह व्रत करती हैं। वहीं, जिन दंपतियों को संतान प्राप्ति में बाधाएं आ रही हों, उन्हें भी स्कंद षष्ठी का व्रत रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि कार्तिकेय जी की कृपा से संतान सुख शीघ्र प्राप्त होता है।

Skanda Sashti Vrat Niyam 2026/ हालांकि इस व्रत को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना जरूरी माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए।

स्कंद षष्ठी व्रत की तिथि/Skanda Sashti Vrat Niyam 2026

द्रिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि इस बार 22 फरवरी 2026 को सुबह 11:09 बजे प्रारंभ होगी और 23 फरवरी 2026 को सुबह 09:09 बजे तक रहेगी। ऐसे में स्कंद षष्ठी का व्रत रविवार, 22 फरवरी 2026 को रखा जाएगा।

स्कंद षष्ठी के व्रत में एक बार सात्विक भोजन किया जा सकता है, जिस दौरान फल, दूध, दही, मखाने, सूखे मेवे, कूटू के आटे की पूरी और सेंवई खा सकते हैं, जबकि अनाज, प्याज, लहसुन, शराब और तामसिक भोजन आदि का सेवन करने से बचना चाहिए।

स्कंद षष्ठी व्रत के नियम/Skanda Sashti Vrat Niyam 2026

  • स्कंद षष्ठी व्रत पर पूरे दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • सूर्योदय के समय भगवान कार्तिकेय की पूजा कर व्रत का संकल्प लें।
  • व्रत का पारण अगले दिन सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद करें।
  • व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें, इससे व्रत का फल पूर्ण मिलता है।
  • किसी की निंदा या बुराई करने से बचें।
  • मन, वचन और कर्म से नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

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