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युक्तियुक्तकरण से परेशान शिक्षक फिर सड़कों पर,अगले चरण में संचालनालय और मंत्रालय का घेराव

रायपुर (मनीष जायसवाल)। प्रदेश की राजधानी में ठंड इस बार अजीब ढंग से गरमाई हुई है। छह दिसंबर से तूता धरना स्थल का माहौल तप रहा है और युक्तियुक्तकरण से परेशान शिक्षक फिर से सड़कों पर आ रहे हैं। पिछली बार 23 संगठनों का बड़ा मोर्चा बिखर गया था, मगर इस बार छोटा दिखने वाला आंदोलन भी बड़े संकेत दे रहा है। जो इस विवाद को फिर राजनीतिक केंद्र में खड़ा कर सकता है।

यह विरोध ऐसे समय उठा है जब 14 से 17 दिसंबर तक नए विधानसभा भवन में शीतकालीन सत्र होना है। सत्ता के भीतर भी इन दिनों राजनीतिक ताप कम नहीं है…। ऐसे में रायपुर में उठी यह चिंगारी युक्तियुक्तकरण विवाद को दोबारा ज्वालामुखी की तरह उभार रही है। सरकार इस समय किसी अस्थिरता के मूड में नहीं, मगर शिक्षकों की आवाज लगातार तेज़ होती जा रही है।

शिक्षकों का कहना है कि य युक्तियुक्तकरण अपने उद्देश्य से भटक गया है और शिक्षा की गुणवत्ता को चोट पहुंचा रहा है। छह महीने बाद भी न्याय नहीं मिला। कई शिक्षक अभी तक नई पोस्टिंग पर ज्वाइन नहीं कर पाए और जिन्होंने किया, उन्होंने मजबूरी में किया। जिला से लेकर संचालनालय तक बनी समितियों ने न समय-सीमा का पालन किया और न ही सुनवाई में गंभीरता दिखाई। आदेश कागजो में अटके रहे और सुविधाएं अंततः रसूखदारों के हिस्से में चली गईं।

आंदोलन की अगुवाई कर रहे प्रतिनिधियों का कहना है कि न्यायालय से राहत न मिलने के बावजूद उम्मीद नहीं छोड़ी है..। अव्यवस्थाओं और अनदेखियों ने फिर एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया है। तूता में भुवन सिंहा, सुशील शर्मा, वीरेंद्र दुबे सहित अनेक शिक्षक मौजूद रहे। महेंद्रगढ़, कोंडागांव, सुकमा, बलरामपुर, जांजगीर, कोरबा और बिलासपुर जैसे जिलों से आए शिक्षकों ने भी अपनी आवाज़ उठाई और साफ कहा कि अगला चरण संचालनालय और मंत्रालय के घेराव का होगा।

धरने में वरिष्ठता उल्लंघन, वास्तविक रिक्तियों को छिपाने, महीनों से वेतन-निरोध, न्यायालयीन आदेशों की अवमानना, पति–पत्नी स्थानांतरण नीति की अनदेखी और 2008 सेटअप में गलत अतिशेष घोषणाएं सबसे ज्यादा गूंजी है । आंदोलन छोटा जरूर है, लेकिन संकेत बहुत बड़े हैं..!

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
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