युक्तियुक्तकरण से परेशान शिक्षक फिर सड़कों पर,अगले चरण में संचालनालय और मंत्रालय का घेराव

यह विरोध ऐसे समय उठा है जब 14 से 17 दिसंबर तक नए विधानसभा भवन में शीतकालीन सत्र होना है। सत्ता के भीतर भी इन दिनों राजनीतिक ताप कम नहीं है…। ऐसे में रायपुर में उठी यह चिंगारी युक्तियुक्तकरण विवाद को दोबारा ज्वालामुखी की तरह उभार रही है। सरकार इस समय किसी अस्थिरता के मूड में नहीं, मगर शिक्षकों की आवाज लगातार तेज़ होती जा रही है।
शिक्षकों का कहना है कि य युक्तियुक्तकरण अपने उद्देश्य से भटक गया है और शिक्षा की गुणवत्ता को चोट पहुंचा रहा है। छह महीने बाद भी न्याय नहीं मिला। कई शिक्षक अभी तक नई पोस्टिंग पर ज्वाइन नहीं कर पाए और जिन्होंने किया, उन्होंने मजबूरी में किया। जिला से लेकर संचालनालय तक बनी समितियों ने न समय-सीमा का पालन किया और न ही सुनवाई में गंभीरता दिखाई। आदेश कागजो में अटके रहे और सुविधाएं अंततः रसूखदारों के हिस्से में चली गईं।
आंदोलन की अगुवाई कर रहे प्रतिनिधियों का कहना है कि न्यायालय से राहत न मिलने के बावजूद उम्मीद नहीं छोड़ी है..। अव्यवस्थाओं और अनदेखियों ने फिर एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया है। तूता में भुवन सिंहा, सुशील शर्मा, वीरेंद्र दुबे सहित अनेक शिक्षक मौजूद रहे। महेंद्रगढ़, कोंडागांव, सुकमा, बलरामपुर, जांजगीर, कोरबा और बिलासपुर जैसे जिलों से आए शिक्षकों ने भी अपनी आवाज़ उठाई और साफ कहा कि अगला चरण संचालनालय और मंत्रालय के घेराव का होगा।
धरने में वरिष्ठता उल्लंघन, वास्तविक रिक्तियों को छिपाने, महीनों से वेतन-निरोध, न्यायालयीन आदेशों की अवमानना, पति–पत्नी स्थानांतरण नीति की अनदेखी और 2008 सेटअप में गलत अतिशेष घोषणाएं सबसे ज्यादा गूंजी है । आंदोलन छोटा जरूर है, लेकिन संकेत बहुत बड़े हैं..!





