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नदी किनारे भारी-भरकम बोरे बरामद, रासायनिक कचरे की आशंका..लोगों में हड़कंप

बिलासपुर…अरपा नदी का शांत किनारा इन दिनों एक असामान्य रहस्य की चपेट में है। पौधरोपण स्थल के पास अचानक दर्जनों भारी-भरकम बोरे पाए जाने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। बोरों में मौजूद सफेद अज्ञात पाउडर ने न केवल स्थानीय लोगों के मन में शंका पैदा की है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि अरपा नदी का यह हिस्सा पिछले दो दशकों से अवैध गतिविधियों और कब्ज़े की कोशिशों का गवाह रहा है। ऐसे में सांस्कृतिक मंच द्वारा हरियाली बढ़ाने के लिए किए गए पौधरोपण के बाद यह क्षेत्र स्थिरता की ओर बढ़ रहा था, लेकिन अब मिले संदिग्ध बोरे इस भूमि को फिर विवादों के केंद्र में ले आए हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार झाड़ियों के बीच 10 से अधिक बड़े और अत्यंत भारी बोरे पड़े मिले हैं। इनमें भरा पाउडर किस प्रकृति का है, यह अभी अज्ञात है, क्योंकि किसी बोरे पर लेबल, चेतावनी संकेत या कंपनी का नाम तक नहीं है। लोगों का कहना है कि इतनी मात्रा में बोरे लाना किसी संगठित समूह की गतिविधि प्रतीत होती है, न कि किसी एक-दो व्यक्ति की हरकत।

बोरों में मौजूद सामग्री को लेकर कई आशंकाएँ व्यक्त की जा रही हैं। क्षेत्र छठ पूजा स्थल के निकट होने के कारण स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ जाते हैं। स्थानीय लोग आशंका जता रहे हैं कि यह रासायनिक या औद्योगिक कचरा हो सकता है, जो पानी और मिट्टी को विषाक्त कर सकता है। वहीं कुछ लोग इसे जमीन खाली करवाने या डर का माहौल बनाने की साजिश भी मान रहे हैं। इलाके में पिछले कुछ समय से रात में संदिग्ध गतिविधियों की चर्चाएँ भी हो रही हैं।

पाटलिपुत्र सांस्कृतिक मंच के एक सदस्य ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने यहां पेड़ लगाए और स्थल को संरक्षित रखने की कोशिश की, लेकिन कुछ ताकतें हरियाली को समाप्त करने के इरादे से सक्रिय प्रतीत होती हैं। “यह बोरे किसने रखे, इसका पता सिर्फ जांच से ही चल पाएगा,” उन्होंने कहा।

इस पूरे प्रकरण ने प्रशासन की चौकसी पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। संवेदनशील क्षेत्र होने के बावजूद यहां सुरक्षा की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है, न ही नियमित निरीक्षण।

अरपा नदी तट पर अचानक प्रकट हुआ यह “बोरा कांड” अब सिर्फ पर्यावरणीय चिंता नहीं रह गया है। यह किसी बड़े नेटवर्क, गुप्त गतिविधि या जमीन से जुड़े गहरे खेल की झलक भी हो सकता है। जब तक बोरों की जांच, उनकी उत्पत्ति और इन्हें रखने वालों की पहचान स्पष्ट नहीं होती, तब तक इस मामले का रहस्य और गहराता ही जाएगा।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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