Madhya Pradesh

MP News- संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने 8 सूत्रीय मांगों के साथ की स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात, आंदोलन की चेतावनी

कर्मचारियों ने समय पर वेतन भुगतान, नियमितीकरण, नीति आयोग के गठन सहित अपनी अन्य मांगों के तुंरत पूरा करने की मांग की है। इनका कहना है कि इन वर्कर के लिए कोई भी पॉलिसी नहीं है और इतना अधिक काम करने के बावजूद इनकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही।

MP News/मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।

प्रदेशभर के शासकीय अस्पतालों में काम कर रहे इन 30 हजार से ज्यादा कर्मचारियों ने अपनी 8 सूत्रीय प्रमुख मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

उन्होंने सीधे स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला से मुलाकात कर चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे

मध्यप्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने अपनी मांगों का एक ज्ञापन स्वास्थ्य मंत्री को सौंपा है। इन मांगों में वेतन भुगतान में देरी और अनियमितता के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं:

  1. नियमितीकरण की मांग: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत काम कर चुके संविदा सपोर्ट स्टाफ को विभाग में खाली पदों पर नियमित किया जाए या उन्हें वापस मिशन में शामिल किया जाए।
  2. नीति आयोग का गठन: उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति आयोग बनाया जाए, ताकि उनकी सेवाओं और हितों की रक्षा हो सके।
  3. सेवानिवृत्त कर्मचारियों की बहाली: जिन कर्मचारियों ने पहले सेवा दी है और अब वे सेवा में नहीं हैं, उन्हें भी वापस नियमित किया जाए।
  4. मातृत्व अवकाश और सुविधाएँ: महिला कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों के समान 6 महीने का मातृत्व अवकाश और अन्य सुविधाएँ दी जाएं।
  5. सेवा से न हटाया जाए: नीति आयोग के गठन के बिना किसी भी कर्मचारी को सेवा से नहीं हटाया जाना चाहिए।
  6. वार्षिक समीक्षा: नियमितीकरण की प्रक्रिया की वार्षिक समीक्षा को अनिवार्य किया जाए।
  7. पुरानी नीति लागू हो: संविदा नीति 2018 और 2023 को महंगाई भत्ते सहित पूरी तरह से लागू किया जाए।
  8. वेतन की समस्या: वर्तमान में, निजी कंपनियों के माध्यम से काम करने वाले इन कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। संघ का आरोप है कि उन्हें केवल 60 से 70 प्रतिशत वेतन ही दिया जाता है। कई जिलों में तो 5-6 महीनों से वेतन रुका हुआ है, जिससे कर्मचारियों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कर्मचारियों के संघ से मुलाकात के बाद कहा है कि उनकी मांगों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

हालांकि, कर्मचारी संघ की प्रदेशाध्यक्ष कोमल सिंह ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि आंदोलन के दौरान उत्पन्न किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

Back to top button