भूख से मासूम ने तोड़ा दम..सिस्टम खामोश…परिजनों ने लगाया यह गंभीर आरोप

जगदलपुर… “अगर समय पर दूध मिल गया होता, तो मेरा बच्चा जिंदा होता…” — यह दर्दनाक वाक्य उस मां के हैं, जिसने भूख से बिलखते अपने तीन महीने के मासूम को अपनी आंखों के सामने मरते देखा। यह दिल दहला देने वाला मामला जगदलपुर के माँ दंतेश्वरी ट्रॉमा एंड क्रिटिकल केयर सेंटर से सामने आया है,l परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर की देरी और अस्पताल की लापरवाही ने उनके बच्चे की जान ले ली।
क्या है पूरा मामला क्या ह?
नयामुंडा निवासी आशीष मंडल और निशा मंडल के बेटे मिताश मंडल का जन्म सामान्य था। लेकिन तीन महीने बाद सिर थोड़ा बड़ा दिखने पर वे शिशु रोग विशेषज्ञ के पास पहुँचे,l जिन्होंने न्यूरो केस बताकर मना कर दिया। इसके बाद उन्हें डॉ. पवन बृज न्यूरोसर्जन से माँ दंतेश्वरी अस्पताल में संपर्क करने की सलाह दी गई।
डॉ. बृज ने ऑपरेशन को “20 मिनट का सामान्य प्रोसीजर” बताकर भरोसा दिया, और बच्चे को भर्ती कर लिया।
ऑपरेशन से पहले छह घंटे तक भूखा रखा
परिजनों के मुताबिक, ऑपरेशन से पहले 2 बजे के बाद से बच्चे को दूध नहीं दिया गया। डॉक्टर शाम 4 बजे आने वाले थे, लेकिन 6:30 बजे तक नहीं पहुँचे। इस दौरान बच्चा लगातार भूख से रोता रहा, पर नर्सों ने कहा, “डॉक्टर बस आ रहे हैं।”
8:15 बजे अस्पताल ने सिर्फ बच्चे का शव सौंप दिया।
बताया गया – “धड़कन धीमी थी, ऑपरेशन नहीं कर पाए।”
70 हजार की फीस, मौत के बाद लौटाया पैसा
माता-पिता ने बताया कि भर्ती और दवाओं के नाम पर 70 हजार रुपये वसूला गया।बच्चे की मौत के बाद हंगामे के बीच रुपया लौटाया गया। । लेकिन वे सवाल कर रहे हैं —
“क्या हमारा बच्चा अब वापस आएगा?”
कहाँ और किन पर शिकायत?
घटना के बाद परिजनों ने डॉ. पवन बृज और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और बोधघाट थाना में लिखित शिकायत की है।अस्पताल को सील करने और डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
परिजन की पुकार: ” बच्चा मारक गया, न्याय चाहिए”
निशा मंडल का कहना है:
“हमारा बेटा बिल्कुल ठीक था। भूख लगी थी, रो रहा था। डॉक्टर समय पर आ जाते, तो शायद वो आज जिंदा होता।”
प्रशासन से सवाल:
घटनाक्रम के बाद लोगों के बीच कई सवाल उठने लगे हैं । कश अस्पताल में इलाज के लिए अलग से कोई आईसीयू वार्ड नहीं है।ऑपरेशन से पहले अनावश्यक देरी की गई।इतनी देरी क्यों हुई? फिलहाल प्रशासन अभी तक मौन है। और ना ही किसी पर इस घटना के लिए जवाबदेही तय की गई है। यह बहुत ही शर्मिन्दा की बात है।
CMHO और पुलिस की चुप्पी क्या बताती है?
अभी तक CMHO की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। पुलिस ने परिजनों की शिकायत जरूर ली है। लेकिन अभी तक अस्पताल या डॉक्टर के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।





