500 करोड़ का सपना, 3.13 करोड़ गायब: विदेशी ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश, एसएसपी रजनेश सिंह ऑन एक्शन
पुलिस कप्तान का...500 करोड़ निवेश’ का फर्जी खेल बेनकाब

बिलासपुर.. चकरभाठा थाना क्षेत्र में सामने आए हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी के मामले ने शहर को झकझोर दिया है। विदेशी निवेश और 103 करोड़ के डिमांड ड्राफ्ट क्लियरेंस का झांसा देकर एक प्रार्थी से 3 करोड़ 13 लाख 13 हजार रुपये ठग लिए गए। पुलिस ने मामले में हरियाणा निवासी नवीन जून को गिरफ्तार किया है, लेकिन जांच में बड़े नेटवर्क के संकेत मिल रहे हैं।
“डॉ. लोव्हीत” से शुरू खेल, व्हाट्सएप का जाल
जनवरी-फरवरी 2024 में एक विदेशी नंबर से आए व्हाट्सएप मैसेज ने पूरे खेल की नींव रखी। खुद को ग्रेट ब्रिटेन निवासी “डॉ. लोव्हीत” बताने वाले शख्स ने भरोसा कायम किया और फिर “ग्रेस डेविड” नाम की कथित महिला (स्कॉटलैंड) से संपर्क कराया। यहीं से करोड़ों के निवेश का सपना दिखाकर जाल बुना गया।
500 करोड़ निवेश का लालचपार्टनर का झांसा
ग्रेस डेविड ने भारत में कैंसर अस्पताल, ब्लाइंड इंस्टिट्यूट, रियल एस्टेट और लॉ कॉलेज में करीब 500 करोड़ रुपये निवेश की योजना बताई। प्रार्थी को इस प्रोजेक्ट का पार्टनर बनाने का प्रस्ताव दिया गया। भरोसे के इस जाल में फंसकर प्रार्थी ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट तक तैयार करवाई और लगातार संपर्क बनाए रखा।
103 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट, करोड़ों की वसूली
10 जून 2024 को कथित तौर पर महिला के भारत आने और उसके नाम पर स्कॉटलैंड बैंक से जारी 103 करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट के क्लियरेंस की बात कही गई। इसके बाद खर्च, होटल, एंबेसी, बैंक, आरबीआई, ईडी और कस्टम प्रक्रिया के नाम पर पैसे की मांग लगातार बढ़ती गई—और यहीं से शुरू हुआ असली खेल।
11.50 लाख से शुरू होकर 3.13 करोड़ की ठगी
प्रार्थी ने पहले आरटीजीएस और ऑनलाइन माध्यम से करीब 11.50 लाख रुपये ट्रांसफर किए। इसके बाद आरोपी नवीन जून के खाते में अलग-अलग किस्तों में कुल 3 करोड़ 13 लाख 13 हजार रुपये जमा कर दिए गए। रकम बढ़ती गई, लेकिन “डिमांड ड्राफ्ट” कभी क्लियर नहीं हुआ।
फर्जी ईमेल से ‘अधिकारी’ बनकर ठगा
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने फर्जी ईमेल आईडी बनाकर खुद को बैंक, एंबेसी और सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर प्रार्थी को भ्रमित किया। हर बार नए बहाने और नए कागजों के जरिए रकम निकलवाई गई। पूरा ऑपरेशन तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव का मिश्रण था।
बैंकिंग एजेंट रहा आरोपी, कबूला जुर्म
पूछताछ में आरोपी नवीन जून ने अपराध स्वीकार किया। वह पहले बैंक में डायरेक्ट सेलिंग एजेंट रहा है और बैंकिंग प्रक्रिया की जानकारी का इस्तेमाल कर अपने साथियों के साथ इस ठगी को अंजाम दिया।
थार, वेन्यू , मोबाइल-लैपटॉप जब्त
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से Thar और Venue वाहन, मोबाइल फोन, टैबलेट और लैपटॉप जब्त किए हैं। इन डिजिटल साक्ष्यों के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। जांच में अन्य आरोपियों की संलिप्तता भी सामने आ रही है।
कानूनी शिकंजा,आईटी एक्ट, बीएनएस की धाराएं
मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 3(5) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(घ) के तहत अपराध दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
डिजिटल ठगी अब संगठित अपराध,एसएसपी
पुलिस कप्तान रजनेश सिंह ने इस मामले को गंभीर साइबर अपराध बताते हुए साफ कहा कि “यह सिर्फ एक ठगी नहीं, बल्कि संगठित डिजिटल अपराध का हिस्सा है। तकनीक और भरोसे का दुरुपयोग कर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे मामलों में शामिल हर आरोपी को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “साइबर ठग चाहे देश में हों या बाहर, बिलासपुर पुलिस हर स्तर पर कार्रवाई कर रही है। आर्थिक अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए मजबूत साक्ष्य के साथ केस तैयार किया जा रहा है।
निष्कर्ष: सपना जितना बड़ा, जाल उतना गहरा
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साफ कर दिया कि साइबर ठग अब सिर्फ लिंक या कॉल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़े निवेश, विदेशी पहचान और सरकारी प्रक्रिया का मुखौटा पहनकर लोगों को फंसा रहे हैं। यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उस नेटवर्क की झलक है, जो भरोसे को ही हथियार बनाकर करोड़ों का खेल खेल रहा है।





