बिलासपुर… बहतराई के खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में खिलाड़ियों की डाइट को लेकर शिकायत सामने आते ही खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने सीधे जिम्मेदारों से जवाब मांग लिया है। संचालक आकांक्षा शिक्षा खलखो ने बिलासपुर के विभागीय सहायक संचालक ए. एक्का और संबंधित भोजन प्रदायक फर्म को नोटिस जारी कर 24 घंटे में स्पष्टीकरण और तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा है। मामले की स्थल जांच के लिए संचालनालय स्तर से दो खेल अधिकारियों की समिति भी बनाई गई है। समिति सेंटर पहुंचकर भोजन व्यवस्था और सामने आई शिकायत की वस्तुस्थिति की पड़ताल करेगी।

डाइट का मामला सामने आते ही विभाग ने जिस तेजी से कार्रवाई की है, उसने बहतराई की पूरी खेल व्यवस्था को एक बार फिर सामने ला दिया है। सवाल सिर्फ खिलाड़ियों की थाली का नहीं है। सवाल यह भी है कि खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, मैदान, रखरखाव और रोजमर्रा की सुविधाओं की निगरानी स्थानीय स्तर पर किस तरह हो रही है और इन व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी की भूमिका कितनी प्रभावी है।

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थाली पर शिकायत.. मैदानों पर शिकायतें कब तक?

बहतराई में खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हाल ही में बहतराई की आवासीय हॉकी अकादमी की खिलाड़ी गीता यादव और मधु सिदार ने जूनियर महिला हॉकी एशिया कप में भारतीय टीम की जीत में योगदान दिया और प्रतियोगिता में चार-चार गोल किए। यानी जिस केंद्र से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकल रहे हैं, उसी केंद्र की डाइट को लेकर अब विभाग को जांच बैठानी पड़ी है।

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मैदान और दूसरी सुविधाओं को लेकर तस्वीर इतनी सहज नहीं है। जून में उप मुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरुण साव के औचक निरीक्षण में निर्माण और मरम्मत कार्यों की धीमी रफ्तार सामने आई थी। तीरंदाजी मैदान का काम जुलाई तक पूरा कराने, हाई मास्ट लाइट की मरम्मत और लंबित कार्यों की प्रगति रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे।

यानी डाइट की शिकायत आज सामने आई है, लेकिन बहतराई की व्यवस्थाओं पर सवाल इससे पहले भी सरकारी निरीक्षण के स्तर तक पहुंच चुके हैं।

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एक्का के जिम्मे व्यवस्था, जवाबदेही पर सवाल

स्थानीय खेल व्यवस्था से जुड़े मामलों में ए. एक्का की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके स्तर पर खिलाड़ियों और खेल गतिविधियों से जुड़ी व्यवस्थाओं की निगरानी होती है। इसके बावजूद खेल से जुड़े लोगों की शिकायत है कि अधिकारी तक पहुंचना ही मुश्किल है।

पत्रकारों के मुताबिक खेल गतिविधियों या व्यवस्थाओं से संबंधित जानकारी के लिए संपर्क करने पर कई बार फोन रिसीव नहीं होता। खेल क्षेत्र से जुड़े लोगों की भी यही शिकायत है कि अधिकारी उपलब्ध नहीं रहते। विभागीय स्तर पर संवाद और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

ऐसे में मौजूदा डाइट विवाद में ए. एक्का को नोटिस मिलना केवल भोजन की शिकायत तक सीमित मामला नहीं रह गया है। अब निगाह इस बात पर भी है कि स्थानीय स्तर पर खिलाड़ियों की डाइट, प्रशिक्षण व्यवस्था और मैदानों की निगरानी किस तरह होती रही है।

मैदानों की हालत और रखरखाव का सवाल

बहतराई में खेल परिसर, प्रशिक्षण केंद्र और राष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं मौजूद हैं। इसके बावजूद मैदानों और सुविधाओं के रखरखाव को लेकर शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। जून के निरीक्षण में लंबित मरम्मत और निर्माण कार्यों पर उच्च स्तर से नाराजगी दर्ज होना भी इसी व्यवस्था का हिस्सा है।

अब सवाल डाइट से आगे बढ़कर रखरखाव पर खर्च होने वाले संसाधनों तक पहुंच रहा है। खिलाड़ियों के स्वास्थ्य, प्रशिक्षण और खेल सुविधाओं के लिए आने वाली राशि किन मदों में खर्च हुई, कौन-से काम हुए और उनका असर मैदान पर कितना दिखाई देता है—इसका हिसाब भी व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकता है। बहतराई में डाइट की जांच के लिए समिति बन गई है। अब मैदानों की हालत और रखरखाव पर खर्च का हिसाब भी सामने आया तो तस्वीर और साफ होगी।

बड़े आयोजन से पहले कमियां, बाद में वही सवाल

खेल गतिविधियों और राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों के समय बहतराई की व्यवस्थाएं फिर चर्चा में आती हैं। मैदान, मरम्मत, सुविधाएं और तैयारियां सवालों के केंद्र में रहती हैं। खेल से जुड़े लोगों का आरोप है कि आयोजन के आसपास व्यवस्थाओं को लेकर नकारात्मक रिपोर्ट और आपत्तियां सामने आती रही हैं, लेकिन स्थायी समाधान की स्थिति अब भी सवालों में है।

इसी बीच ए. एक्का की कार्यशैली को लेकर भी लंबे समय से शिकायतें होने की बात कही जाती रही है। कार्यालय में उपलब्धता से लेकर फोन पर जवाब देने तक के मामले में खेल जगत और मीडिया के बीच असंतोष की चर्चा है। अब डाइट के मामले में सीधे नोटिस जारी होने के बाद ये पुराने सवाल फिर सामने हैं।

कार्रवाई ने बढ़ाई निगरानी की उम्मीद

फिलहाल विभाग ने डाइट के मामले में गेंद सीधे संबंधित अधिकारी और भोजन प्रदायक फर्म के पाले में डाल दी है। 24 घंटे में जवाब, स्थल जांच और दो सदस्यीय समिति—तीनों कदम बताते हैं कि विभाग शिकायत को रिकॉर्ड पर लेकर आगे बढ़ रहा है। जांच में अनियमितता या लापरवाही मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की बात भी संचालक ने कही है।

लेकिन बहतराई की मौजूदा तस्वीर में डाइट अकेला सवाल नहीं है। खिलाड़ियों की थाली की जांच शुरू हुई है तो अब मैदान की हालत, रखरखाव, सुविधाओं और स्थानीय स्तर पर निगरानी की व्यवस्था भी जांच के दायरे में आने लगी है।

और इसी के बीच सबसे बड़ा स्थानीय सवाल ए. एक्का की भूमिका को लेकर है—डाइट पर नोटिस मिल चुका है, अब वर्षों से चल रही खेल व्यवस्था और मैदानों की हालत पर उनकी जवाबदेही का हिसाब कौन लेगा?