रिहायशी अपार्टमेंट में गोदाम की आग: नियम जले या रिश्ते बचे? नक्शा कहता पार्किंग, हकीकत बनी गोदाम—जवाब दे निगम
48 परिवारों की जान जोखिम में, किसने दी गोदाम की छूट?

बिलासपुर.. मंगला क्षेत्र स्थित गज मोहिनी अपार्टमेंट के भूतल पर बने इलेक्ट्रिकल-इलेक्ट्रॉनिक सामान के गोदाम में अल सुबह आग भड़क उठी। देखते ही देखते धुआँ 48 फ्लैटों में भर गया और परिवारों में अफरातफरी मच गई। दमकल को सूचना दी गई, टीम पहुँची भी, लेकिन टैंकर में पानी खत्म होने की वजह से शुरुआती समय में आग पर काबू नहीं पाया जा सका। स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर प्रयास शुरू किए, तब जाकर स्थिति संभली। बड़े जानमाल के नुकसान से बचाव हुआ, पर माल का भारी नुकसान हुआ।
सबसे बड़ा सवाल आग से भी बड़ा है—जिस जगह को अपार्टमेंट के नक्शे में पार्किंग के लिए चिन्हित किया जाता है, वहाँ गोदाम कैसे खड़ा हो गया? क्या नगर निगम ने इसकी अनुमति दी? अगर दी, तो किस आधार पर? और अगर नहीं दी, तो यह निर्माण किसकी निगरानी में हुआ?
अपार्टमेंट और बड़े प्रतिष्ठानों की पार्किंग से कब्जा हटाने का अभियान पहले चल चुका है। भारी पेनाल्टी भी लगी। फिर गज मोहिनी परिसर पर नजर क्यों नहीं पड़ी? चर्चा यह भी है कि परिसर के मालिक अरुण अग्रवाल और मनन अग्रवाल ने भूतल को गोदाम में तब्दील कर दिया। अनुमति ली गई थी या नहीं—इस पर स्पष्ट जवाब नहीं मिला। निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे से संपर्क का प्रयास हुआ, जवाब नहीं मिला। मनन अग्रवाल ने फोन उठाया, पर अनुमति संबंधी सवाल को अपने पिता पर टाल दिया।
यह सिर्फ एक आग की घटना नहीं, शहरी नियोजन और निगरानी की परीक्षा है। रिहायशी इलाके में ज्वलनशील सामान का गोदाम—किस नियम के तहत? यदि अनुमति नहीं थी तो कार्रवाई कहाँ है? यदि अनुमति थी तो नीति क्या कहती है?
48 से अधिक परिवारों की सुरक्षा दांव पर लगी। धुआँ फ्लैटों में भरा, बच्चे-बुजुर्ग घबराए। सवाल अब सीधे प्रशासन की ओर है—क्या इस मामले की स्वतंत्र जाँच होगी? क्या जिम्मेदारी तय होगी? और क्या भविष्य में पार्किंग को गोदाम में बदलने की प्रवृत्ति पर कठोर रोक लगेगी?
आग बुझ चुकी है, पर सवाल धधक रहे हैं।





