जी राम जी या मजदूर-विरोधी साजिश? बिलासपुर में सिंहदेव ने खोली परतें
मनरेगा बचाओ संग्राम: जी राम जी के खिलाफ प्रदेशभर में कांग्रेस की प्रेस वार्ता

बिलासपुर…भारत सरकार की प्रस्तावित जी राम जी ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन योजना के विरोध में शुक्रवार को कांग्रेस ने प्रदेश के सभी 33 जिलों में एक साथ प्रेस वार्ता आयोजित की। राजधानी रायपुर से लेकर न्यायधानी बिलासपुर तक इस अभियान को “मनरेगा बचाओ संग्राम” नाम दिया गया।
बिलासपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव ने केंद्र सरकार की जी राम जी योजना पर तीखा प्रहार करते हुए इसे मनरेगा को खत्म करने की सोची-समझी साजिश करार दिया।
विकसित भारत की बात, लेकिन मजदूर कल क्या खाए
सिंहदेव ने कहा कि सरकार विकसित भारत 2047 की परिकल्पना कर रही है, लेकिन उसे यह समझ में नहीं आ रहा कि कल का मजदूर क्या खाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा एक कानूनी रोजगार गारंटी थी, जहां मजदूर काम मांगता था और सरकार को काम देना पड़ता था, बजट बाधा नहीं बनता था।
इसके उलट, जी राम जी योजना को मिशन मोड में लाकर बजट की सीमा से बांध दिया गया है। सिंहदेव ने कहा कि सरकार 100 दिन की जगह 125 दिन रोजगार देने का दावा कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि पिछले 11 वर्षों में राष्ट्रीय औसत महज 38–40 दिन का रहा है।
राम सबके हैं, गांधी भी—लेकिन सरकार गरीब की नहीं
प्रेस वार्ता के दौरान सिंहदेव ने तीखा राजनीतिक-सांस्कृतिक सवाल उठाते हुए कहा कि राम सबके हैं और राम के सबसे बड़े उपासक महात्मा गांधी थे। उन्होंने कहा कि जब सरकार गांधी के नाम और उनके आदर्शों को हटाने में संकोच नहीं करती, तो फिर राम का नाम जोड़ना सिर्फ ध्रुवीकरण की राजनीति है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी जी राम जी परियोजना में भगवान राम का कहीं कोई उल्लेख नहीं है, फिर भी इसे राम के नाम पर पेश किया जा रहा है। सिंहदेव ने कहा, “गांधी भी सबके हैं, राम भी सबके हैं, लेकिन यह सरकार किसी गरीब मजदूर की नहीं है।”
मनरेगा कानून में बदलाव.. श्रमिक-विरोधी हमला
सिंहदेव ने कहा कि मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़ा अधिकार था, जिसे अब एक कंडीशनल, केंद्र-नियंत्रित स्कीम में बदला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने सुधार के नाम पर लोकसभा में ऐसा बिल पास किया है, जिससे दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मनरेगा गांधी के ग्राम स्वराज और विकेंद्रीकृत विकास की जीवंत मिसाल थी, लेकिन अब न सिर्फ गांधी का नाम हटाया गया, बल्कि 12 करोड़ मजदूरों के अधिकारों को भी कुचला जा रहा है।
बोझ राज्यों पर—मनरेगा खत्म करने की तैयारी
सिंहदेव ने बताया कि पहले मनरेगा में 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देती थी, लेकिन अब इसे बदलकर 60:40 कर दिया गया है। इतना ही नहीं, केंद्र अब तब तक पैसा जारी नहीं करेगा, जब तक राज्य पहले अपना हिस्सा जमा न करें। उन्होंने कहा कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों पर भारी बोझ पड़ेगा और यही रास्ता अंततः मनरेगा को बंद करने की ओर ले जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि जी राम जी योजना के जरिए केंद्र सरकार राज्यों पर लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डालना चाहती है।
125 दिन का वादा सिर्फ छल”— रोक का आरोप
सिंहदेव ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार आने के बाद 70 प्रतिशत गांवों में अघोषित रूप से मनरेगा काम रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार 11 वर्षों में एक भी साल 100 दिन का रोजगार देने में विफल रही है, ऐसे में 125 दिन का दावा खोखला और भ्रामक है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा अब अधिकार नहीं रहा, बल्कि एक प्रशासनिक मदद बना दिया गया है, जो पूरी तरह केंद्र की मर्जी पर निर्भर है।
आजीविका के नाम पर ठेकेदारों को फायदा
सिंहदेव ने जी राम जी के फुल फॉर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन के नाम पर असल में ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने की योजना बनाई गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि आजीविका के नाम पर बड़े ठेके दिए जाएंगे, मजदूरों का शोषण होगा और रोजगार की गारंटी खत्म हो जाएगी।
अंत में सिंहदेव ने ऐलान किया कि कांग्रेस मनरेगा के बचाव के लिए अनवरत आंदोलन करेगी और जल्द ही इसे लेकर देशव्यापी भारत बंद और जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।




